प्रदूषण पर निबंध – Pradushan Par Nibandh

नमस्ते दोस्तों मेने इस पोस्ट में प्रदूषण पर निबंध कैसे लिखना है उसके बारे में पूरा जानकारी दी है। एग्जाम में किस प्रकार से हैडिंग बनानी चाहिए और पुरे अंक कैसे प्राप्त करना है उसके लिए आपको पोस्ट को लास्ट तक पढ़ना होगा ।

प्रदूषण पर निबंध में कौन कौन से हैडिंग लिखनी है इन सभी के बारे में मेने इस पोस्ट में पुरे जानकारी दिया है और डिटेल्स में लिखा है ।  प्रदूषण पर निबंध में हिंदी भाषा  के संबधित  महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में जानकारी दिया है । पोस्ट  को लास्ट तक पढ़िए और प्रदूषण  पर निबंध कैसे लिखे उसको समझिये । असा करता हूँ की आप लोगो को काफी अच्छा लगेगा।

प्रदूषण पर निबंध - Pradushan Par Nibandh
प्रदूषण पर निबंध – Pradushan Par Nibandh

प्रदूषण पर निबंध

निबंध की रुपरेखा

  • प्रस्तावना
  • प्रदूषण का अर्थ
  • प्रदूषण के प्रकार
  • प्रदूषण के कारण
  • प्रदूषण की समस्या का समाधान
  • उपसंहार

प्रस्तावना 

पर्यावरण शब्द का अर्थ है परि + आवरण । परि का अर्थ है – चारों ओर और आवरण का अर्थ है – घिरा हुआ अर्थात पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है – चारों ओर से घेरा हुआ । पर्यावरण में दूषित पदार्थो के कारण प्रकृति में भारी मात्रा में नुकसान होता है। वातावरण में प्रदूषण होने के कारण जीव – जंतु और मनुष्य को नुकसान पहुंचता है। मानव का जीवन स्वच्छ वायु , जल पर ही निर्भर है , ऐसे में यह प्रदूषण की समस्या बहुत बड़ी समस्या है क्यूंकि इससे प्रकृति को नुकसान हो रहा है।

प्रदूषण की समस्या पर यदि ध्यान नहीं दिया गया तो यह आगे चलकर प्रकृति विकराल रूप धारण कर सकती है। इससे प्रकृति को तो नुकसान होता ही है साथ में मनुष्य को विभिंन प्रकार की बीमारियों का सामना भी करना पड़ता है। प्रदूषण फैलाने में सबसे बड़ा हाथ मनुष्य का ही है। विभिंन प्रकार के कारखाने , प्लास्टिक , कूड़ा – कचड़ा इत्यादि से वातावरण में प्रदूषण फैलता है। हमें अपनी प्रकृति को बचाने के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए और उन सभी चीज़ो को नहीं करना चाहिए जिससे पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है।

प्रदूषण का अर्थ 

जीवमंडल के भैतिक, रासायनिक व जैविक गुणों के ऊपर जो हानिकारक प्रभाव पड़ता है और जल, वायु, मिट्टी, आदि आवांछित पदार्थ से दूषित होना ही प्रदूषण है।

प्रदूषण के प्रकार 

  1. वायु प्रदूषण 
  2. जल प्रदूषण 
  3. ध्वनि प्रदूषण 
  4. मृदा प्रदूषण / भूमि प्रदुषण
  5. रासायनिक प्रदूषण 
  6. रेडियोधर्मी प्रदूषण 

1.वायु प्रदूषण 

वातावरण में उपस्थित रसायन और अन्य सूक्ष्म कणों के मिश्रण को वायु प्रदूषण कहते हैं। वायु प्रदूषण क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC), कार्बन मोनोऑक्सीडे (CO), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), उदयोग, मोटर वाहनों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO) जैसे प्रदूषकों से होता हैं। वायु प्रदूषण की वजह मनुष्य को सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता हैं। अन्य कोई बीमारियों का खतरा भी रहता हैं।

2.जल प्रदूषण 

मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग जल हैं। और जल को जीवन कहा गया हैं । जल प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह मनुष्य जल में सभी प्रकार की चीज़ो को डाल देता हैं । इसी वजह से जल दूषित हो जाता हैं और पिने योग्य भी नहीं रहता हैं। यदि जल को कोई भी पि लेता हैं तो उसे विभिन प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं। नदियों और तालाबों में कूड़ा – कचरा, जानवरों को नहलाना, कपड़े धुलना अन्य कोई प्रकार से जल को दुर्षित किया जाता हैं।

3.ध्वनि प्रदूषण 

वातावरण में ध्वनि प्रदूषण अनियंत्रित , अन्यधिक तीव्र और असहनीय ध्वनि की वजह से होता हैं। ध्वनि प्रदूषण की तीब्रता को ” डेसीबल ” (Decibel) इकाई से मापा जाता हैं। शहरों और गावों में  त्यहार, चुनाव में लाउडस्पीकर बहुत तेज जलाया जाता हैं, इसकी वजह से ध्वनि प्रदूषण होता हैं।

4.मृदा प्रदूषण / भूमि प्रदुषण

इस प्रकार के प्रदूषण मानव की वजह से होते हैं । क्यूंकि मृदा से ज्यादा उत्पादन करने की वजह से मिट्टी में तरह तरह के पदार्थो को मिलाया जाता हैं । जिससे उत्पादकता तो अधिक होती हैं लेकिन मृदा को काफी मात्रा में नुकसान पहुंचना हैं। मृदा प्रदूषण को ” भूमि प्रदुषण ” भी कहा जाता हैं ।

5.रासायनिक प्रदूषण 

यह प्रदूषण कारखानों से बहने वाले अपशिष्ट द्रब्य के कारण होता हैं। यह नदियों में पहुंचकर के जल को भी दुर्षित करता हैं। बहुत से रासायनिक पदार्थो से मानव को तो नुकसान होता ही हैं, लेकिन इसके साथ – साथ नदियां, तालाब, सागर, जीव जंतु , प्रकृति इन सभी को नुकसान उठाना पड़ता हैं।

6.रेडिओधर्मी प्रदूषण 

रेडिओधर्मी प्रदूषण ठोस, तरल, गैसीय पदार्थ में जहाँ अवाछोनिओ रेडिओधर्मी पदार्थ की उपस्थिति होती हैं, उसे रेडिओधर्मी प्रदूषण कहते हैं। परमाणु कचरे का लापरवाही से निपटना, परमाणु संयोत्र में दुर्घटनाएं, इसका प्रभाव पर्यावरण, जीव जन्तुओं और मनुष्य पर पड़ता हैं।

प्रदूषण के कारण 

प्रदूषण के निम्नलिखित कारण हैं –

  • सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा कचरा ।
  • रासायनिक पदार्थ ।
  • कारखानों से निकलने वाले पदार्थ ।
  • प्लास्टिक ।
  • जनसंख्या में वृद्धि ।
  • बृक्षों को काटना।
  • तालाब और झीलों को नष्ट करना।
  • जगह जगह गंदा पानी जमा होना।
  • जल में कूड़ा – कचरा और जानवरों को नहलाना ।
  • कूड़े को जलना।
  • वाहनों से निकले वाला धुआँ ।
  • उदयोग धंधे ।
  • धूम्रपान

प्रदूषण की समस्या का समाधान 

प्रदूषण को काम करने के लिए निम्नलिखित समाधान हैं –

  • प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • रासायनिक पदार्थो को जल में नहीं जाने देना चाहिए।
  • जल में कूड़ा – कचरा नहीं फेंकना चाहिए ।
  • पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में लगाना चाहिए ।
  • गांव और शहरो में तालाब और नल की ब्यबस्था करनी चाहिए ।
  • भूमि में उर्वरक क्ष्य्मता को बढ़ाने के लिए बाहरी पदार्थो का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • कूड़े – कचड़े को जलाना नहीं चाहिए।
  • निजी वाहनों के जगह सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करना चाहिए।
  • सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी नहीं फैलाना चाहिए।
  • वनों की कटाई पर रोक लगानी चाहिए।

उपसंहार 

आज के समय में प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या हैं। और इसलिए हम सभी का कर्तब्य हैं प्रदूषण को कम करने के लिए जो उपाय हैं उनका पालन करें और प्रकृति को सुंदर और स्वस्थ बनाएं। वृक्ष पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण अंग हैं । वृक्ष जरूर लगाने चाहिए। इससे प्रदूषण से होने वाले दुष्परिणामों से काफी हद तक बचा जा सकता हैं।

प्रदूषण का एक बड़ा कारण बढ़ती जनसंख्या भी हैं । इसकी वजह से वनों की कटाई करते हैं और अपने रहने के लिए निवास बनाते हैं। इस वजह से हमारी प्रकृति में जो पेड़ पौधे हैं वह भी नष्ट हो रहे हैं। इसलिए हमें अपने भबिष्य को सुरक्षित और स्वस्थ बनाएं रखने के लिए बहुत से कदम उठाने चाहिए । प्रदूषण को ख़त्म करने के लिए कानून का पालन सही ढंग से होना चाहिए।

” वृक्ष लगाए, प्रकृति बचाइए “

 

 

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