होली पर निबंध – Essay on Holi Festival

दोस्तों इस पोस्ट में मैंने होली पर निबंध को  डिटेल्स (Details ) में लिखा है । एग्जाम में किस प्रकार से हैडिंग बनानी चाहिए और पूरे अंक कैसे प्राप्त करें। होली पर निबंध में कौन कौन सी हैडिंग लिखनी चाहिए इन सभी के बारे में डिटेल्स में लिखा है। होली पर निबंध में होली से सम्भदित सभी महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में जानकारी दिया है। तो पोस्ट को पूरे पढ़े और अच्छे से जानकारी हासिल  करें ।

होली पर निबंध
होली पर निबंध – Essay on Holi Festival.

होली पर निबंध

  1. प्रस्तावना
  2. होली कब मानते हैं
  3. होली क्यों मनाते हैं
  4. होली कैसे मनाते हैं
  5. होलिका दहन की बिधि
  6. भारत के बिभिनं खेत्रों में प्रसिद्ध होलियां
  7. उपसंहार

प्रस्तावना

भारत  में होली एक ऐसा त्यौहार  है जो देश के सभी लोगो से साथ खुसी के साथ मनाते हैं । हमारे देश में जितने  भी त्यौहार  मनाया जाते हैं उन सभी के  पीछे कोई न कोई कारन अवस्य होता हैं । होली रंग का त्यौहार हैं । इस त्यौहार पर हर तरफ उत्साह और  उमंग रहती हैं। गांव में किसानो की फसल काटने के लिए तैयार हो जाती हैं, सभी किसान बहुत खुस होते हैं । अपने अपने खेतों की फसल से नए अनाज की बालियों को होली में होलिका पर भूनते हैं । इस रंग भरे त्यौहार को सभी लोग एक दूसरे के साथ मिलकर  मनाते हैं । सभी लोग जाती, धर्म , ऊंच- नीच का भेदभाव भूलकर के भाई – चारे के  साथ  इस त्यौहार  को  मनाते हैं ।

होली कब मनाते हैं

होली का त्यौहार ऋतुराज बसंत ऋतु के आगमन पर फाल्गुन मास की पूर्णिमा को ये त्यौहार  मनाते  हैं, उस समय खेतों में सरसों के पिले फूल लहराते हैं । किसान के खेतों में रवि की फसल काटने के लिए तैयार हो जाती हैं । सभी किसान बहुत खुश होते हैं । होली का दहन में उनके गेहूं , जों की बालियों का प्रयोग किया जाता हैं।

होली क्यों मनाते हैं

होली के संबधित एक प्रथा प्रचलित हैं। प्राचीन समय में एक दैत्य राजा हिरण्यकश्यप अर्ज्यावर्त में राज  करता था । वह खुद को सबसे बड़ा मानता था और प्रजा उसकी पूजा करती थी । हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था उसका  नाम  प्रल्हाद था। हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रल्हाद को एक बार  नारद  जी ने आकर बिष्णु मंत्र का जप करने की प्रेरणा दी और तब से प्रल्हाद बिष्णु की पूजा उपासना करने लगा।

हिरण्यकश्यप को जब पता चला की उसका पुत्र बिष्णु भक्त  हैं और बिष्णु जी का उपासना करता हैं तो उसको बहुत क्रोध आया और वो अपने पुत्र के इस भक्ति को  रोकने के लिए नाना प्रकार के जतन किए परन्तु हिरण्यकश्यप असफल रहा। भक्त  प्रल्हाद को प्यार से समझने से नहीं माना । वह अपनी  पूरी भक्ति श्रद्धा से करता रहा । हिरण्यकश्यप ने तरह- तरह  की चाल चोली  ताकि प्रह्लाद बिष्णु की भक्ति को छोड़ दे, परन्तु ऐसा कुछ नहीं हुआ। हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका  नाम होलिका थी । 

होलिका को आग आगं जलने का वरदान  प्राप्त था, तो हिरण्यकश्यप ने अपने बहन से कहा की वह  प्रलाह्द को आग में लेकर बैठ जाए, उससे उसका पुत्र भी मर जायेगा और उसके  बहन को कुछ नहीं होगा। होलिका ने ठीक ऐसा ही किया की प्रलाह्द को अपने गोद में बैठाकर आग में बैठ गयी । फिर  बिष्णु के भक्तो का बुरा कैसे हो सकता  हैं । कुछ ऐसा चमत्कार हुआ की भगवान  बिष्णु ने खुद प्रहलाद की रक्षया  की और होलिका उसी आग में जलकर मर गई। इस प्रकार होलिका के दहन से हमे ये सिख  मिलती हैं की बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती हैं। तबसे हर साल  होली फेस्टिवल को  बड़े धूम धाम से मनाया जाता हैं।

होली कैसे मनाते हैं 

होली को भारत में 2 दिन मनाया जाता हैं । होली के एक दिन पहले की रात को सभी लोग मिलकर के होलिका का दहन करते हैं । होली के कुछ दिन पहले लोग अपने अपने घरो  में गुजिया, चावल के  एस्से, नमक के पारे, आलू के चिप्स, आलू के पापड़ और बहुत सारे मिठाया  बनाते हैं और बाजार से भी खरीद के लाते हैं । होली पर  तरह तरह के रंग, पिचकारी, गुलाल ये सब खरीद के लाते हैं ।

होली वाले दिन सभी लोग एक दूसरे  से मिलते हैं और एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं । गुजिया , पापड़ , मिठाई सब मिलकर के खाते हैं । बड़ो का आशिर्बाद लेते हैं। इस प्रकार रंग से भरा  त्यौहार  मनाया  जाता हैं और इस रंग भरे त्यौहार  में सभी लोग बहत खुश होते हैं।

होलिका दहन की बिधि 

रंग वाली होली के ठीक  दिन पहले ही होलिका की दहन की परम्परा  हैं । जिसकी पूजा करने से पहले होलिका को जिस  जगह  पे  रखना  होता हैं  वहा लकड़ी  और गबर से बने  उपले वहा  पे रखे जाते हैं । ये  सब करने के बाद पूजा के लिए  फूल , गंगाजल , माला , कच्चे सूत का  धागा , गेहूं , धुप और कोई सारे सामग्री को रखना होता हैं । और पूजा को सुरु करते हैं ।

होलिका के लिए जो मालाएं बनायीं जाती हैं वह एक माला पितोरो के नाम की दूसरी हनुमान जी  के नाम की , और तीसरी माला सीतला माता जी के नाम की, और चौथी माला परिवार के नाम पे रखी जाती हैं । और फिर होलिका के चारो और परिक्रमा करते हुए जो कच्चे सूत क धागा हैं , उसको साथ में पकड़ के परिक्रमा करते हैं । होलिका को धागे से लपटे देते  हैं । होलिका की परिक्रमा 7 बार करते हैं और फिर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । फिर होलिका में गेहूं की बालियां, हरे चने  अदि चढ़ाया जाते हैं । इस तरह से होलिका की पूजा बिधि करते हैं ।

होलिका दहन की अगले दिन रोंगो से होली खेली जाती हैं और एक दूसरे से गुलाल लगाया जाता हैं । होलिका दहन से हमे  ये पता चलता हैं कि हमारे  समाज में अच्छाई सत्य की बिजय हुई हैं। सभी लोग इसको मिल – जुल कर ही मनाते हैं और एकता का संदेस  देते हैं । 

भारत के बिभिनं खेत्रों में प्रसिद्ध होलियां

भारत के बिभिनं खेत्रों में होली के त्यौहार को अलग – अलग तरीके से मनाया जाता हैं । हर जगह की होली में एक नया रूप देखने को मिलता  है, और उसकी महत्वता और भी बढ़ जाती हैं । अलग – अलग  मानाने के तरीकों कके वजह से आज जगह – जगह की होली बहुत प्रसिद्ध हैं। जो की निम्नलिखित हैं ।

उपसंहार

अंत में कहे सकते हैं की होली का त्यौहार खुसी, प्रेम , एकता का प्रतिक हैं । लोग एक दूसरे से मिल – जुल कर ये त्यौहार मनाते हैं । सभी बच्चे बोड़ो का आशिर्बाद लेते हैं । और घर के सभी सदस्य आसपास के सभी सदस्य के गोले मिलते हैं, उन्हें गुलाल लगाते हैं, गुजिया खिलते हैं । इस प्रकार से एकता का संदेस देते हैं । होली पर सभी को गुलाल से खेलना चाहिए ताकि किसी ब्योक्ति को किसी भी तरह की नुकसान ना हो ।

 

 

 

 

 

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